Sunday, May 17, 2009

Oft In a S(t)illy Night: अक्सर शब्-ए-अडवानी में

Hazrat Mirza Tahir Ahmed translated Thomas Moore's Oft, In a Stilly Night into Urdu. In my opinion, Mirza's translation is among the few where the verses gained in translation, and did not, as it often happens, lose the spirit, imagery or the pathos of the original. Reshma's voice did the rest, it's a melody that grows on you. A rare song where enchanting and haunting become one. And L.K. Advani never knew it was written for him.


Here is Sir Thomas's original:
Oft, in the Stilly Night

Oft, in the stilly night,
Ere slumber's chain has bound me,
Fond memory brings the light
Of other days around me;
The smiles, the tears,
Of boyhood's years,
The words of love then spoken;
The eyes that shone,
Now dimm'd and gone,
The cheerful hearts now broken!
Thus, in the stilly night,
Ere slumber's chain hath bound me,
Sad memory brings the light
Of other days around me.


Saturday, May 16, 2009

बीजेपी को एक और वाजपेयी चाहिए

लोकलोक सभा के नातायाज़ हमारे सामने हैं. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. खुद कांग्रेस के नेता इस बात को मानते हैं कि जीत की आशा थी पर ऎसी जीत होगी पता नहीं था. उन्होंने अपने सहयोगियों और जनता को तो धन्यवाद दिया पर एक आदमी को नहीं जिसने जीत के अंतर को बढ़ाने में कांग्रेस की मदद की. कांग्रेस के लोग तो राहुल गाँधी को इसका सारा श्रेय दे रहे हैं पर एक और गाँधी है जिसने-अनजाने कांग्रेस की मदद की. वरुण गाँधी पीलीभीत से चुनाव जीत गए. पर उन्होंने भाजपा को इस चुनाव में हरा दिया. जो चुनाव विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मुद्दों पर लड़ा जा रहा था संजय गाँधी के पुत्र ने उसे वापस उन मुकाम पर ला खड़ा किया, जहां से उसने शुरुआत की थी। एक चेहरा और एक नकाब से आगे निकल चुकी पार्टी फिर डरावनी लगने लगी। यह चेहरा था या मास्क पर जो भी था, इसे देख कर देश का एक बड़े वर्ग को सांप सुंघा गया.
आज वह भाजपा जिसे अटल बिहारी वाजपयी दक्षिण पंथ से मोड़कर बीच के रास्ते पर लाये थे, फिर एक दोमुहाने पर खड़ी है जहाँ से एक रास्ता अति-दक्षिण पंथ या हार्डकोर हिंदुत्व की ओर जाता है और एक बीच से ठीक दाएं, जिसे सॉफ्ट हिंदुत्व कहा जाता है. हार का विश्लेषण होगा, आत्म मंथन होगा और फिर सवाल खड़ा होगा कि जाएँ तो जाएँ कहाँ. चुनाव के वक़्त एक बड़ी भूल उसने की और वह भूल थी यह बताना कि आगे कौन सा रास्ता अपनाया जाएगा. यह तब हुआ जब नरेन्द्र मोदी को अडवाणी के बाद अगला प्रधानमंत्री घोषित कर दिया. यह बड़ी नाज़ुक घडी थी, चुनाव प्रचार के दौरान. जनता अपना मन बना रही थी. तभी वरुण ने बीजेपी के प्रचार को एक यू-टर्न दे दिया और बीजेपी ने उनकी लाइन को नकारा नहीं. उस के ऊपर मोदी को अडवाणी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. ऐसा नहीं कि उनके मुस्लिम वोट कट गए. मुस्लिम वोट तो बीजेपी का था ही नहीं. पर इस धुर दक्षिणपंथ से हिन्दू डर गए. ख़ास कर मध्य वर्ग और बुद्धिजीवी वर्ग जो इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों पर बीजेपी की तरफ झुका था. दुनिया में आर्थिक मंदी है और भारतीय अर्थव्यवस्था उस से बुरी तरह प्रभावित हो रही थी. हमारे सभी पडोसी देशों में गृह युद्घ जैसा माहौल है. उस में जनता नहीं चाहती कि ऐसे लोग सत्ता आसीन हो जाएँ जो घर की शांति और सद्भाव बिगाड़ दें. बीजेपी को बिहार में बहुत समर्थन मिला क्यूंकि वहां के मोदी, सुशिल कुमार मोदी, वैसी नीतियों में विश्वास करते हैं जो नीतिश कुमार ने बनायी हैं, न कि नरेन्द्र मोदी ने।
अभी भारत देश ऐसे मुकाम पर खडा है जहाँ उसके विश्व शक्ति बन्ने का सपना पूरा होता दिखाई देता है. ऐसा नहीं कि यह सपना सिर्फ कांग्रेस का है. बीजेपी ने अपना प्रचार अभियान इसी से शुरू किया था. पर अचानक वरुण ने नदा के सतरंगे सपने पर गहरा भगवा पोत दिया. प्रचार अचानक निगेटिव हो गयी. व्यक्तिगत आघात-और प्रत्याघात बढ़ गए. जनता पोजिटिव थी. और काफी अरसे बाद पोजिटिव वोटिंग हुई इस देश में. मनमोहन सिंह की छवि और उनके पांच साल के शाशन में सद्भाव और शांति रही, प्रगति होती रही. और परिणाम सबके सामने है।
नीतिश कुमार बीजेपी के साथ रहे फिर भी उनके पोजिटिव केम्पेन को जनता ने पसंद किया. वहां मुसलमानों ने भी बीजेपी को वोट किया। कंधमाल में भगवा ब्रिगेड के आचार के बाद नवीन पटनायक के लिए बीजेपी के साथ रहना संभव नहीं रहा था. वहां भी बीजेपी का सूपड़ा साफ़ हो गया और नवीन पटनायक ने फिर झंडा गाडा. बीजेपी के पास पांच साल हैं एक लीडर तलाशने को. अडवाणी की उम्र हो गयी है. मोदी के ऊपर दाग है. इस पार्टी को एक नेता चाहिए जो अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, विकास और सुरक्षा के मामलों में आक्रामक हो पर हिंदुत्व के मुद्दे पर सॉफ्ट हो. बीजेपी को एक वाजपयी चाहिए. कोई है?