Wednesday, September 16, 2009

किस सादगी से तुमको खुदा कह गए हैं हम

फैशन और चलन से दूर सादगी से जीवन बिताना एक उच्च विचार है, पर अगर सादगी ही फैशन में आ जाए तो क्या करें. कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं ने स्वयं साधारण श्रेणी में यात्रा कर एक अच्छा उदाहरण दिया है पर पार्टी के नेताओं का बड़बोला अनुसरण और सादगी के बढ़-चढ़ के प्रचार ने सब किरकिरा कर दिया. जनसाधारण ने तिरछी मुस्कान के साथ इसका स्वागत किया है पर ज़रा सा कुरेदिए और सब इसे ढकोसला मान रहे हैं. इस का एक कारण यह है कि लगातार बयानबाजी और सादगी के दिखावे के कारण यह ढकोसले की श्रेणी में स्वयं आ जाता है. दूसरा ये कि देश में नेताओं की विश्वसनीयता का लगातार ह्रास हुआ है और ज़्यादातर लोग इसे मौसम का बुखार मान रहे हैं.

इस सादगी पे कौन ना मर जाए ऐ खुदा,
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं!
शशि थरूर वित्त मंत्री के फटकार के पहले एक पांच-सितारा होटल में रह रहे थे. उन्होंने कहा कि जब वह अगली बार केरल जायेंगे तो उन्हें मवेशी के साथ सफ़र करने में भी कोई आपत्ति नहीं. खीझ कर कांग्रेस के युवा प्रवक्ता और लुधियाना के सांसद मनीष तिवारी पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें विमान में सामानों के साथ लाद दिया जाये. एस.एम्. कृष्णा ने भी अपना पांच सितारा घोसला छोड़ कर्नाटक भवन में घर बसा लिया है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सादगी के इस बड़बोले प्रचार से असली मुद्दों को दबाने की कोशिश हो रही है. आरोपों-प्रत्यारोपों को छोड़ भी दें तो भी आटे-दाल का भाव तो जनता को मालूम ही है. आलू तक आम आदमी की पहुँच के बाहर जा रही है और नेता अपनी सादगी की प्रतियोगिता में व्यस्त हैं. इस सादगी से देश का कितना भला होगा, इसका अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता.

शशि थरूर या कृष्णा इस लिए होटल में रह रहे थे क्योंकि उनका बँगला तैयार नहीं था. पर उस बंगले में पांच-सितारा होटल से कम खर्च नहीं आयेगा. एक एक बंगले की कीमत दो-दो सौ करोड़ तक है और वहां सुरक्षाकर्मियों और अर्दलियों की भीड़ होती है. हर मंत्री के जाने के बाद दुसरे के लिए इन्हें फिर से तैयार करने पर लाखों खर्च होते हैं. इसी सरकार के तीन मंत्रियों ने अपने दफ्तर की फित्तिंग्स बदलवाने पर ३२ लाख खर्च दिए. वह जब इकोनोमी क्लास में यात्रा करते हैं तो भी खर्च कम नहीं होता क्योंकि उनके साथ कई सुरक्षाकर्मी होते हैं जिनके लिए सीट खरीदनी पड़ती है. अभी से इकोनोमी क्लास में सफ़र करने वाले शिकायत करने लगे हैं कि अब उनके आराम और शांति में खलल आयेगी अगर कोई तथाकथित अति अति-महत्वपूर्ण व्यक्ति उनके बीच आ धमके. और वहीँ इस सादगी का मूलमंत्र है. आम आदमी को सादगी का सन्देश देने के लिए अगर विशिष्ट नेता और अफसरगन आम आदमी के साथ चलना सीख लें तो फिर कोई उनके बिज़नस क्लास में सफ़र करने पर आँखें नहीं तरेरेगा. अपने आसपास सुरक्षा का आडम्बर जो आम आदमी को परेशानी में डाले वह त्याग दें तो ही काफी है. कुछ के लिए व्यापक सुरक्षा आवश्यकता है पर अधिकतर लोग इसे अपना अधिकार मान जनता से जनता पर धौंस जमाते हैं.

किस शौक़,किस तमन्ना, किस दर्जा सादगी से;
हम आपकी शिकायत करते हैं आप ही से!!

महात्मा गाँधी की सादगी पर होने वाले खर्चे के बारे में सरोजिनी नायडू के विचार दुहराने की ज़रुरत नहीं है. सोनिया गाँधी के नेतृत्व का कांग्रेस के नेताओं पर गहरी पकड़ है. कमज़ोर मानसून और खाद्यान्न संकट की आशंकाओं से अगर महात्मा गांधी के विचारों की याद आये तो गाँधी जी की आत्मा गदगद नहीं होगी. गांधीजी का अनुसरण करने की नीयत हो तो राजनीति और बाबूशाही में जड़ जमाये भ्रष्टाचार का उन्मूलन करने की कसम सोनिया गाँधी अपने नेताओं को दिलाएं. यही वो जगह है जहाँ आम आदमी अपने अधिकारों के लिए नेताओं और अफसरों के पैर पकड़ता है. जहाँ आम आदमी को पुलिस के सान्निध्य में ज़्यादा असुरक्षित महसूस करता है. जहाँ उसे अहसास होता है कि वह आम है. उसकी सादगी उसकी मजबूरी है, तमाशा नहीं. उसकी बेकसी तमाशा भले हो.

सादगी तो हमारी ज़रा देखिये ऐतबार आपके वादे पर कर लिया;
अपना अंजाम सब हम को मालूम था आपसे दिल का सौदा मगर कर लिया!!

1 comment:

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

दिख कुछ ऐसे रहा है जैसे इस बचत क्रांति को देश की हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति के बराबर ले जाकर खड़ा कर दिया जाएगा। या शायद उससे भी बड़ी क्रांति हो। शनिवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने दिल्ली से कोलकाता इकोनॉमी क्लास में सफर किया। फिर सोनिया गांधी ने दिल्ली से मुंबई की यात्रा इकोनॉमी क्लास में की। ये अलग बात है कि सुरक्षा के मद्देनजर जो इंतजाम सोनियाजी के लिए जरूरी हैं उसकी वजह से खर्च कम तो हुआ नहीं। क्योंकि, अगर सोनियाजी बिजनेस क्लास में यात्रा करतीं तो, खर्च आता 62,000 रुपए और इकोनॉमी में आगे 5 कतारें बुक की गईं जिसका खर्च आया 55,000 रुपए यानी किराए में बचत हुई सिर्फ 7,000 रुपए की और हल्ला ऐसे हुआ जैसे पूरे देश में बचत आंदोलन की योजना का उद्घाटन हुआ हो। सुरक्षा के लिए जो 3 टाटा सफारी दिल्ली से मुंबई हवाई जहाज में लादकर ले जाई गई उसका खर्च आया 3 लाख रुपए। जिस फ्लाइट में सोनिया मैडम गईं हैं उसी में बिजनेस क्लास में 8 में से 4 सीटें खाली गईं- ये कौन सी बचत है।

http://batangad.blogspot.com/2009/09/blog-post_15.html